Tuesday, September 11, 2012

उनींदी याद के झरोखों से तू मुझे आज भी सताती है
















तू मेरे पास ज्यों ही आती है
ज़िंदगी हंसती मुसकुराती है

सुन के मेरी दास्तान-ए-दिल
वक्त की आंख छलक आती है

वक्त लाता है ऐसे मोडो पर
ज़िंदगी सहम-सहम जाती है

उनींदी याद के झरोखों से
तू मुझे आज भी सताती है

घुप अंधेरे में रोशनी भर दें
हूं दीया, तू मेरी बाती है

खत्म हो चुकीं रात की बातें
तू तो नाहक ही अब लजाती है

बहते पानी सा 'पथिक'रहता  है
वह न आता है याद आती है

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