और हम सदमें में हैं
गज़ल हुक्मरां खुद चल के आये और हम सदमें में हैं वे गले लग मुसकुराये और हम सदमें में हैं ढेरों वादे , गिले-शिकवे , कानाफूसी , गुफ्तगू जाने क्या-क्या कह रहे वे ? और हम सदमें में हैं वे शहीदों की शहादत पर फफक कर रो रहे मुट्ठियां भिंच सी रही हैं और हम सदमें में हैं घर से बाहर और बाहर से बहुत बाहर तलक छा गया तम घना गहरा और हम सदमें में हैं जेल से छूटे तो सीधे जेल मंत्री बन गये ज़श्न में डूबा शहर है और हम सदमें में हैं इतने बरसों बाद भी वे , झूठ पर कायम रहे सच झुकाये सिर खडा है और हम सदमें में हैं ' पथिक ' जब से मंज़िलों की बात करने लग गये रास्तों ने की बगावत और हम सदमें में हैं , ------ अरविंद पथिक